भारत में बड़ी संख्या में लोग कार चलाते हैं, लेकिन टायरों की देखभाल को लेकर अक्सर लापरवाही कर देते हैं। टायर ही वह हिस्सा हैं जो कार और सड़क के बीच सीधा संपर्क बनाते हैं। ऐसे में अगर टायर सही स्थिति में न हों तो ड्राइविंग अनुभव खराब हो सकता है और खर्च भी बढ़ सकता है। इसी वजह से Wheel Alignment यानी पहियों का सही संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।
व्हील एलाइनमेंट क्यों है जरूरी
जब कार सड़क पर चलती है तो उसका पूरा वजन टायरों पर पड़ता है। अगर टायर का एलाइनमेंट बिगड़ा हुआ हो तो गाड़ी एक तरफ खिंच सकती है, स्टीयरिंग में कंपन महसूस हो सकता है और टायर जल्दी घिस सकते हैं। लंबे समय तक ऐसा होने पर टायर बदलने की नौबत जल्दी आ जाती है, जिससे हजारों रुपये का अतिरिक्त खर्च हो सकता है।
समय पर एलाइनमेंट का फायदा
नियमित अंतराल पर व्हील एलाइनमेंट कराने से कई फायदे मिलते हैं:
- टायर की उम्र बढ़ती है।
- कार की राइड क्वालिटी बेहतर होती है।
- स्टीयरिंग ज्यादा स्मूद महसूस होता है।
- ईंधन की खपत भी नियंत्रित रहती है क्योंकि टायर सही दिशा में चलते हैं।
अगर आपकी कार चलते समय एक दिशा में खिंचती है या स्टीयरिंग में कंपन होता है, तो यह संकेत है कि व्हील एलाइनमेंट की जरूरत है।
कब कराना चाहिए एलाइनमेंट
जानकारों के मुताबिक हर 3,000 से 4,000 किलोमीटर के बाद व्हील एलाइनमेंट कराना उचित होता है। अगर आप लंबी दूरी की यात्रा करते हैं या खराब सड़कों पर ज्यादा ड्राइव करते हैं, तो यह अंतराल और छोटा हो सकता है।
किन बातों का रखें ध्यान
- हमेशा किसी भरोसेमंद सर्विस सेंटर से एलाइनमेंट कराएं।
- कोशिश करें कि सेंटर पर ऑटोमैटिक सेट-अप मशीन हो, जिससे ज्यादा सटीक एलाइनमेंट हो सके।
- अगर आपके घर के पास अच्छा सर्विस सेंटर है तो नियमित जांच कराना आसान रहेगा।
नतीजा
कार चलाते समय व्हील एलाइनमेंट को नजरअंदाज करना सीधे आपके खर्चे पर असर डाल सकता है। समय पर एलाइनमेंट कराने से न सिर्फ टायर की लाइफ बढ़ती है बल्कि ड्राइविंग भी सुरक्षित और आरामदायक होती है। इसलिए अगली बार जब कार सर्विस कराएं तो व्हील एलाइनमेंट जरूर चेक कराएं।

