New Labour Codes 2025 के लागू होने के बाद कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी पाने के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले ग्रेच्युटी का लाभ लेने के लिए किसी कंपनी में कम से कम 5 साल तक काम करना जरूरी था। लेकिन नए नियमों के तहत अब यह अवधि घटाकर 1 साल कर दी गई है। यानी कर्मचारी सिर्फ एक साल की नौकरी करने के बाद भी ग्रेच्युटी का हकदार हो सकता है। हालांकि इसमें एक शर्त है, जिसके कारण कई कर्मचारियों को यह लाभ नहीं मिल पाएगा।
किसे नहीं मिलेगा ग्रेच्युटी का पैसा?
नए लेबर कोड के अनुसार, ग्रेच्युटी पाने के लिए कर्मचारी को लगातार 1 साल तक कंपनी में काम करना जरूरी है। अगर इस दौरान कर्मचारी ने लंबा ब्रेक लिया है या बीच में नौकरी छोड़कर फिर से जॉइन किया है, तो उसकी सर्विस को निरंतर नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में ग्रेच्युटी का भुगतान अटक सकता है।
ग्रेच्युटी कैसे होती है कैलकुलेट?
ग्रेच्युटी की गणना एक तय फॉर्मूले से की जाती है:
[ ग्रेच्युटी = (आखिरी सैलरी \times 15 \times सर्विस के साल) / 26 ]
यहां “लास्ट ड्रॉन सैलरी” में बेसिक पे और महंगाई भत्ता शामिल होता है। अगर कर्मचारी ने आखिरी साल में छह महीने से ज्यादा काम किया है, तो उसे अगले पूरे साल में राउंड अप कर दिया जाता है।
उदाहरण से समझें
मान लीजिए किसी कर्मचारी ने एक साल नौकरी की है और उसकी आखिरी सैलरी ₹30,000 है। तो ग्रेच्युटी की गणना इस तरह होगी:
[ ग्रेच्युटी = (30,000 \times 15 \times 1) / 26 = ₹17,307 ]
यानी एक साल की नौकरी पर कर्मचारी को लगभग ₹17,307 रुपये ग्रेच्युटी मिलेगी।
निष्कर्ष
Gratuity Rules 2025 कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आए हैं क्योंकि अब 5 साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लेकिन ध्यान रहे कि ग्रेच्युटी तभी मिलेगी जब आपकी सर्विस लगातार हो। बीच में लंबा ब्रेक लेने या ई-वेरिफिकेशन जैसी औपचारिकताओं को पूरा न करने पर ग्रेच्युटी का पैसा अटक सकता है।

