भारत में इलेक्ट्रिक कारों की चर्चा तो अक्सर होती है, लेकिन अब हाइड्रोजन फ्यूल सेल गाड़ियां भी धीरे-धीरे सुर्खियों में आ रही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक महिला Hyundai NEXO हाइड्रोजन SUV से निकले पानी को पीते हुए दिखाई देती है। पत्रकार मेधा यादव ने इस अनुभव को साझा करते हुए बताया कि पानी का स्वाद बिल्कुल RO पानी जैसा था। इस वीडियो ने लोगों का ध्यान हाइड्रोजन कारों की तकनीक और उनकी खासियतों की ओर खींचा है।
वायरल वीडियो का अनुभव
वीडियो में दिखाया गया कि Hyundai NEXO हाइड्रोजन SUV के एग्जॉस्ट से पानी टपक रहा है। मेधा यादव ने एक ग्लास लेकर पानी इकट्ठा किया और फिर उसे पी लिया। उनके मुताबिक यह पानी साफ और पारदर्शी था। उन्होंने मजाक में कहा कि यह भारत की नदियों से कहीं ज्यादा साफ है। NEXO में पानी ऑटोमैटिक निकलता है, लेकिन इसमें एक स्विच भी दिया गया है जिसे दबाने पर पूरा पानी एक बार में बाहर आ जाता है।
हाइड्रोजन कार की खासियत
हाइड्रोजन फ्यूल सेल कारें पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों से अलग होती हैं। इनमें हाइड्रोजन को फ्यूल सेल में इस्तेमाल कर इलेक्ट्रिक मोटर को चलाया जाता है।
- इन गाड़ियों से केवल पानी निकलता है, कोई हानिकारक गैस नहीं।
- एक बार फुल टैंक करने पर ये कारें करीब 600 किलोमीटर तक चल सकती हैं।
- फ्यूल भरने में समय बहुत कम लगता है, ठीक वैसे ही जैसे पेट्रोल या डीजल कार में।
- ड्राइविंग अनुभव इलेक्ट्रिक कार जैसा ही होता है, लेकिन चार्जिंग का इंतजार नहीं करना पड़ता।
- हाइड्रोजन हवा से हल्का और गैर-विषैला होता है। रिसाव होने पर यह तेजी से हवा में फैल जाता है, जिससे आग लगने का खतरा कम रहता है।
भारत में हाइड्रोजन कारों की संभावना
भारत में फिलहाल इलेक्ट्रिक कारों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन हाइड्रोजन फ्यूल सेल गाड़ियों की एंट्री आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। Hyundai NEXO जैसी कारें यह दिखाती हैं कि भविष्य में गाड़ियां न केवल प्रदूषण कम करेंगी बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित होंगी।
नतीजा
Hyundai NEXO के इस वायरल वीडियो ने यह साबित कर दिया कि हाइड्रोजन कारें सिर्फ तकनीकी रूप से एडवांस नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प हो सकती हैं। एग्जॉस्ट से निकला पानी पीने योग्य होना अपने आप में एक अनोखा अनुभव है। आने वाले समय में अगर भारत में हाइड्रोजन कारों का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होता है, तो यह गाड़ियां इलेक्ट्रिक कारों के साथ एक मजबूत विकल्प बन सकती हैं।

