निवेश की दुनिया में SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान अब सिर्फ म्यूचुअल फंड तक सीमित नहीं है। अब क्रिप्टोकरेंसी में भी SIP के जरिए निवेश करना संभव हो गया है।
जैसे ELSS म्यूचुअल फंड में आप हर महीने एक तय रकम निवेश करते हैं, वैसे ही अब बिटकॉइन, एथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी में भी SIP के जरिए निवेश किया जा सकता है।
काम कैसे करता है Crypto SIP
क्रिप्टो SIP में आप एक फिक्स्ड रकम और समयावधि तय करते हैं—जैसे ₹500 हर महीने। इसके बाद प्लेटफॉर्म आपके वॉलेट से तय रकम डेबिट करता है और मौजूदा कीमत पर क्रिप्टो खरीद लेता है।
जब कीमत कम होती है, तो ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और जब कीमत ज्यादा होती है, तो कम यूनिट्स मिलती हैं। इससे आपकी औसत खरीद कीमत संतुलित रहती है।
क्या हैं फायदे
- नियमित बचत की आदत: SIP से निवेश ऑटोमेटेड हो जाता है, जिससे आप हर महीने बचत करते हैं।
- मार्केट वोलैटिलिटी का असर कम: अलग-अलग कीमतों पर खरीदारी से उतार-चढ़ाव का असर कम होता है।
- छोटी रकम से शुरुआत: कई प्लेटफॉर्म ₹100 से भी SIP शुरू करने की सुविधा देते हैं।
- ट्रैकिंग की जरूरत नहीं: रोजाना मार्केट देखने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि प्रोसेस ऑटोमेटेड होता है।
- लंबे समय में वेल्थ क्रिएशन: कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है अगर आप लंबे समय तक निवेशित रहते हैं।
कितना मिल सकता है रिटर्न
म्यूचुअल फंड SIP में आमतौर पर 12–15% सालाना रिटर्न की उम्मीद रहती है। क्रिप्टो SIP में भी कुछ प्लेटफॉर्म इसी रेंज का अनुमान देते हैं, लेकिन इसमें जोखिम ज्यादा होता है।
क्रिप्टो मार्केट में उतार-चढ़ाव तेज होता है, इसलिए यहां रिटर्न की गारंटी नहीं होती। वहीं ELSS जैसे म्यूचुअल फंड्स में जोखिम थोड़ा कम होता है और रिटर्न का अनुमान ज्यादा स्थिर रहता है।
अगर आप रिस्क लेने को तैयार हैं और डिजिटल एसेट्स में दिलचस्पी रखते हैं, तो क्रिप्टो SIP एक नया विकल्प हो सकता है। लेकिन निवेश से पहले रिसर्च और सलाह जरूर लें।

