आजकल स्मार्टफोन सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। हम दिन में कई बार फोन अनलॉक करते हैं, कॉल करते हैं, सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं और स्क्रीन को बार-बार टच करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी एक आम आदत धीरे-धीरे आपके फोन की स्क्रीन को नुकसान पहुंचा रही है?
स्क्रीन की स्मूदनेस का राज़ – ओलियोफोबिक कोटिंग
स्मार्टफोन की स्क्रीन पर एक बेहद पतली और पारदर्शी परत होती है, जिसे ओलियोफोबिक कोटिंग कहा जाता है। इसका काम है स्क्रीन को फिंगरप्रिंट, तेल और धूल से बचाना। यही वजह है कि नया फोन इस्तेमाल करते समय स्क्रीन स्मूद लगती है और उस पर दाग-धब्बे जल्दी नहीं दिखते।
लेकिन समय के साथ यह कोटिंग घिसने लगती है। खासकर तब, जब हम बार-बार स्क्रीन को साफ करते हैं—कभी शर्ट की बाजू से, कभी टिशू से या फिर किसी भी कपड़े से। यह आदत धीरे-धीरे कोटिंग को खत्म कर देती है, जिससे स्क्रीन धुंधली और चिपचिपी लगने लगती है।
बार-बार सफाई करना क्यों है नुकसानदायक?
फोन की स्क्रीन को बार-बार रगड़ने से उसकी ओलियोफोबिक लेयर कमजोर हो जाती है। अगर आप स्क्रीन क्लीनर या अल्कोहल बेस्ड वाइप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो यह नुकसान और तेज़ हो सकता है। धीरे-धीरे स्क्रीन पर फिंगरप्रिंट ज्यादा दिखने लगते हैं, और टच एक्सपीरियंस भी पहले जैसा नहीं रहता।
कैसे बचाएं स्क्रीन को?
- सबसे पहले, स्क्रीन को बार-बार साफ करने से बचें।
- अगर सफाई करनी ही है, तो माइक्रोफाइबर कपड़े का इस्तेमाल करें।
- टेम्पर्ड ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर लगाना एक अच्छा विकल्प है। इससे आपकी असली स्क्रीन की कोटिंग सुरक्षित रहती है और जरूरत पड़ने पर आप सिर्फ प्रोटेक्टर बदल सकते हैं।
- केमिकल क्लीनर से बचें, खासकर वे जिनमें अल्कोहल या अमोनिया हो।
क्यों जरूरी है कोटिंग को बचाना?
आज के स्मार्टफोन में हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले, बेहतर टच रिस्पॉन्स और विजुअल क्लैरिटी जैसे फीचर्स होते हैं। लेकिन अगर स्क्रीन की ऊपरी परत ही खराब हो जाए, तो इन सभी फीचर्स का अनुभव अधूरा रह जाता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी आदतों पर थोड़ा ध्यान दें और स्क्रीन की देखभाल सही तरीके से करें।

