भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में से एक टाटा ग्रुप (Tata Group) की कंपनी वोल्टास (Voltas) हाल ही में एक बड़े कानूनी विवाद से बाहर निकल आई है। कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने इस याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले से कंपनी को राहत मिली है और दिवालिया संकट से बच गई है।
मामला कैसे शुरू हुआ?
वोल्टास के खिलाफ एयर वेव टेक्नोक्राफ्ट्स नामक कंपनी ने दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी। उनका दावा था कि वोल्टास ने करीब 1.20 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया। इसके लिए फरवरी 2024 में एक डिमांड नोटिस भी भेजा गया था।
ऑपरेशनल क्रेडिटर का कहना था कि वोल्टास ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की और भुगतान से बचने की कोशिश की। वहीं वोल्टास का पक्ष था कि बकाया राशि पर विवाद है और इसे कमर्शियल वेरिफिकेशन के लिए रखा गया है। यही विवाद आगे चलकर कानूनी लड़ाई का कारण बना।
NCLT का फैसला
एयर वेव टेक्नोक्राफ्ट्स ने अगस्त 2024 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) मुंबई बेंच में याचिका दायर की थी। लेकिन 27 मई 2025 को NCLT ने इसे खारिज कर दिया।
NCLT ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच ईमेल चेन और डॉक्यूमेंट्स से साफ है कि विवाद जारी है। काम के सर्टिफिकेशन और रकम को लेकर मतभेद हैं। ऐसे में दिवालिया प्रक्रिया शुरू करना उचित नहीं है।
NCLAT में अपील
NCLT के फैसले को एयर वेव टेक्नोक्राफ्ट्स ने NCLAT में चुनौती दी। लेकिन दो सदस्यीय बेंच ने NCLT के आदेश को सही ठहराया।
NCLAT ने कहा कि:
- NCLT ने कोई गलती नहीं की।
- अपीलकर्ता और वोल्टास के बीच ईमेल और डॉक्यूमेंट्स से स्पष्ट है कि विवाद जारी है।
- ऐसे मामलों में दिवालिया प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती।
इस तरह NCLAT ने भी याचिका खारिज कर दी और वोल्टास को राहत मिली।
वोल्टास का पक्ष
वोल्टास ने कहा कि कंपनी अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन बकाया राशि पर विवाद है और इसे वेरिफिकेशन के बाद ही निपटाया जा सकता है।
कंपनी ने यह भी बताया कि ऑपरेशनल क्रेडिटर द्वारा किए गए दावे में लिमिटेशन का मुद्दा भी शामिल है। यानी बकाया राशि का दावा समयसीमा से जुड़ा हुआ है और इस पर कानूनी रूप से सवाल उठाए जा सकते हैं।
क्यों आई नौबत?
कंपनियों के बीच अक्सर भुगतान और काम के सर्टिफिकेशन को लेकर विवाद होते हैं।
- वोल्टास और एयर वेव टेक्नोक्राफ्ट्स के बीच भी यही स्थिति बनी।
- बकाया राशि पर सहमति नहीं बन पाई।
- क्रेडिटर ने दिवालिया प्रक्रिया का सहारा लिया, लेकिन ट्रिब्यूनल ने इसे विवादित मामला मानकर खारिज कर दिया।
टाटा ग्रुप के लिए राहत
टाटा ग्रुप की वोल्टास एयर कंडीशनिंग और इंजीनियरिंग सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी कंपनी है। दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने से कंपनी की साख पर असर पड़ सकता था। लेकिन NCLAT के फैसले से कंपनी को राहत मिली है।
यह फैसला निवेशकों और ग्राहकों के लिए भी सकारात्मक है। इससे कंपनी की स्थिरता और भरोसेमंद छवि बनी रहती है।
निवेशकों के लिए संकेत
- वोल्टास फिलहाल दिवालिया संकट से बाहर है।
- कंपनी के खिलाफ दायर याचिका खारिज हो चुकी है।
- हालांकि विवाद अभी भी मौजूद है, लेकिन दिवालिया प्रक्रिया का खतरा नहीं है।
- निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति पर नजर रखनी चाहिए, लेकिन फिलहाल कोई बड़ा संकट नहीं है।
निष्कर्ष
TATA Group News के अनुसार, वोल्टास के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई की याचिका NCLAT ने खारिज कर दी है। यह फैसला कंपनी के लिए बड़ी राहत है। विवाद और बकाया राशि का मामला अभी भी जारी है, लेकिन दिवालिया प्रक्रिया शुरू न होने से कंपनी की साख बच गई है।
यह घटना दिखाती है कि व्यापारिक विवादों में कानूनी प्रक्रिया कितनी अहम होती है। साथ ही यह भी बताती है कि किसी कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई तभी शुरू हो सकती है, जब बकाया राशि पर कोई विवाद न हो और दावे स्पष्ट हों।

