रतन टाटा की पहल: 26/11 के बाद ताज होटल को 340 करोड़ से मिली नई पहचान

26 नवंबर 2008 का दिन भारत के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा। मुंबई पर हुए आतंकी हमले में होटल ताज महल पैलेस को भारी नुकसान पहुंचा था। तीन दिन तक चली मुठभेड़ के बाद जब हालात काबू में आए, तो सामने आया कि मुंबई की शान कहे जाने वाले इस 100 साल पुराने होटल को फिर से खड़ा करना आसान नहीं होगा।

21 महीने चला रेनोवेशन

हमले के बाद टाटा समूह ने होटल ताज के पुनर्निर्माण का जिम्मा उठाया। रतन टाटा ने वादा किया था कि होटल के हर हिस्से को उसी गौरव और वैभव के साथ वापस खड़ा किया जाएगा। इस काम में करीब 21 महीने लगे और लगभग 340 करोड़ रुपये (38 मिलियन डॉलर) खर्च किए गए।

किन हिस्सों पर हुआ काम

रेनोवेशन प्रोजेक्ट के दौरान होटल के हेरिटेज विंग को पूरी तरह से नया रूप दिया गया। भव्य बॉलरूम के लौह स्तंभों को सुनहरे रंग में सजाया गया। लक्ज़री सुइट्स को आधुनिक सुविधाओं के साथ फिर से तैयार किया गया। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया। अब ताज महल पैलेस में एडवांस सिक्योरिटी सिस्टम मौजूद है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

रतन टाटा का संकल्प

होटल के पुनः उद्घाटन से पहले रतन टाटा ने कहा था कि यह संपत्ति उसी शान के साथ खुलेगी, जैसी यह पिछले 100 वर्षों से रही है। उन्होंने इस पुनर्निर्मित होटल को 26/11 हमले में मारे गए लोगों को समर्पित किया। 2009 में एक 12 फुट ऊंचा स्मारक भी बनाया गया, जिस पर उस दिन शहीद हुए 31 कर्मचारियों और मेहमानों के नाम दर्ज हैं।

निष्कर्ष

ताज होटल का पुनर्निर्माण सिर्फ एक इमारत को फिर से खड़ा करने का काम नहीं था, बल्कि यह मुंबई और पूरे देश के लिए साहस और उम्मीद का प्रतीक बना। रतन टाटा और टाटा समूह ने यह दिखाया कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प से हर नुकसान को ठीक किया जा सकता है।


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