भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में अक्टूबर और नवंबर के महीनों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। निफ्टी ने नवंबर के आखिर में 26,000 का अहम स्तर पार किया और दिसंबर की शुरुआत में 26,325 का रिकॉर्ड हाई भी बना दिया।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस तेजी के दौरान आम निवेशकों ने बाजार से दूरी बना ली। एनएसई (NSE Data) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, खुदरा निवेशकों ने इन दो महीनों में करीब 25,300 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।
निवेशकों ने क्यों निकाला पैसा?
अक्टूबर में निवेशकों ने लगभग 13,776 करोड़ रुपये और नवंबर में 11,544 करोड़ रुपये की बिकवाली की। यह उस समय हुआ जब सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमशः 4% और 2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। यानी बाजार ऊपर जा रहा था, लेकिन आम निवेशक स्टॉक्स से बाहर निकल रहे थे।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम मुनाफावसूली (Profit Booking) का हिस्सा भी हो सकता है। साल की शुरुआत से ही बाजार में अस्थिरता रही है। ऐसे में जब अक्टूबर और नवंबर में सुधार दिखा, कई छोटे निवेशकों ने इस मौके का फायदा उठाकर अपने निवेश निकाल लिए।
सोना और चांदी बने आकर्षण का केंद्र
स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीणा के अनुसार, सोने और चांदी में आई जबरदस्त तेजी ने निवेशकों का ध्यान शेयर बाजार से हटाकर कीमती धातुओं की ओर कर दिया।
- 2025 में अब तक सोने की कीमत 61% बढ़ चुकी है।
- वहीं चांदी 96% से ज्यादा चढ़ चुकी है।
ऐसे समय में जब शेयर बाजार के कुछ हिस्से अस्थिर बने हुए हैं, सोना और चांदी ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया। यही वजह रही कि कई निवेशकों ने स्टॉक्स से पैसा निकालकर मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स और कीमती धातुओं में निवेश किया।
SIP फ्लो बना रहा स्थिर
हालांकि इक्विटी में एकमुश्त निवेश कम हुआ है, लेकिन एसआईपी (Systematic Investment Plan) फ्लो स्थिर बना हुआ है।
इसका मतलब है कि निवेशक पूरी तरह से शेयर बाजार से भरोसा नहीं खो रहे, बल्कि नियमित छोटे निवेश जारी रख रहे हैं। यह संकेत देता है कि लंबी अवधि में इक्विटी पर भरोसा बरकरार है।
2025 में निवेशकों की भागीदारी
इस साल खुदरा निवेशकों की भागीदारी सुस्त रही है।
- अब तक लगभग 17,900 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली हुई है।
- 2024 में निवेशकों ने सामूहिक रूप से 1.66 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था।
- 2025 में खरीदारी केवल चार महीनों—जनवरी, फरवरी, जुलाई और अगस्त तक सीमित रही।
- बाकी महीनों में लगातार बिकवाली देखने को मिली।
यह आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल स्टॉक्स से हटकर अन्य विकल्पों की ओर चला गया है।
निवेशकों के लिए संकेत
- Diversification जरूरी है – केवल शेयरों पर निर्भर रहने के बजाय सोना, चांदी और मल्टी-एसेट फंड्स में निवेश करना सुरक्षित हो सकता है।
- Profit Booking समझदारी है – जब बाजार ऊंचाई पर हो, तो मुनाफा निकालना कई बार सही रणनीति होती है।
- लंबी अवधि का नजरिया रखें – एसआईपी जैसे निवेश से बाजार की अस्थिरता को संतुलित किया जा सकता है।
- कीमती धातुओं पर नजर रखें – सोना और चांदी ने इस साल बेहतर रिटर्न दिया है, लेकिन इनमें भी उतार-चढ़ाव संभव है।
निष्कर्ष
Share Market Update बताता है कि अक्टूबर और नवंबर में जब भारतीय शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर था, तब आम निवेशकों ने करीब 25,000 करोड़ रुपये निकाल लिए। यह कदम मुनाफावसूली और सोने-चांदी की ओर बढ़ते आकर्षण का नतीजा माना जा रहा है।
हालांकि एसआईपी फ्लो स्थिर है, जिससे संकेत मिलता है कि लंबी अवधि में निवेशकों का भरोसा इक्विटी पर बना हुआ है। फिलहाल छोटे निवेशक स्टॉक्स से दूरी बनाकर वैकल्पिक निवेश विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।

