Repo Rate Explained: क्या है रेपो रेट और EMI पर कैसे पड़ता है असर?

हर दो महीने में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (RBI MPC Meeting) की बैठक होती है। इस बैठक में रेपो रेट (Repo Rate) समेत कई अहम वित्तीय फैसले लिए जाते हैं। दिसंबर में होने वाली बैठक में भी रेपो रेट पर चर्चा होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार केंद्रीय बैंक 0.25% की कटौती कर सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि रेपो रेट क्या होता है और इसका सीधा असर आपकी EMI पर कैसे पड़ता है।

रेपो रेट क्या है?

रेपो रेट वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक, आरबीआई से शॉर्ट टर्म लोन लेते हैं। जब बैंकों को कम ब्याज दर पर पैसा मिलता है, तो वे ग्राहकों को भी कम ब्याज दर पर लोन देते हैं। यही वजह है कि रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI पर पड़ता है।

रेपो रेट कटौती का असर

  • कटौती होने पर: बैंकों को सस्ता लोन मिलेगा और ग्राहकों को भी कम ब्याज दर पर लोन मिलेगा। इससे EMI घट सकती है।
  • बढ़ोतरी होने पर: बैंकों के लिए लोन महंगा हो जाएगा और ग्राहकों को भी ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा। इससे EMI बढ़ जाएगी।
    हालांकि, यह पूरी तरह बैंकों पर निर्भर करता है कि वे रेपो रेट में बदलाव का कितना फायदा ग्राहकों तक पहुंचाते हैं।

RBI क्यों बदलता है रेपो रेट?

केंद्रीय बैंक रेपो रेट में बदलाव कर मनी सप्लाई को नियंत्रित करता है।

  • महंगाई ज्यादा होने पर रेपो रेट बढ़ाया जाता है ताकि लोन महंगे हों और खर्च कम हो।
  • महंगाई कम होने या अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए रेपो रेट घटाया जाता है ताकि लोन सस्ते हों और निवेश बढ़े।

निष्कर्ष

रेपो रेट सिर्फ बैंकों के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी असर डालता है। अगर दिसंबर में रेपो रेट में कटौती होती है, तो होम लोन और अन्य लोन की EMI कम हो सकती है। इसलिए निवेशक और ग्राहक दोनों ही RBI की अगली बैठक पर नजर बनाए हुए हैं।


Author

  • My Full Name Is Ashutosh Behera staying in India, My Education is Degree Complete And Active in social Platfrom is Youtube and Facebook and Other. My Age 21,this site is provide education and new latest news.

    View all posts

Leave a Comment