रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक अहम फैसला लेते हुए अपनी जामनगर SEZ रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद कर दिया है। यह कदम यूरोपीय संघ (EU) के नए नियमों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जो 21 जनवरी 2026 से लागू होंगे। इन नियमों के तहत EU उन पेट्रोलियम उत्पादों का आयात नहीं करेगा जो रूसी तेल से बने होंगे, चाहे वे किसी भी देश की रिफाइनरी से क्यों न आए हों।
रिलायंस की यह रिफाइनरी मुख्य रूप से निर्यात के लिए काम करती है और यूरोप इसका बड़ा बाजार है। ऐसे में कंपनी ने पहले से तैयारी करते हुए 20 नवंबर से रूसी तेल का आयात रोक दिया है। 1 दिसंबर से यहां से होने वाला सारा निर्यात गैर-रूसी तेल से बनेगा।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?
अब सवाल उठता है कि क्या इस फैसले से रिलायंस के शेयरों पर असर पड़ेगा? फिलहाल कंपनी का शेयर ₹1,549.50 पर ट्रेड कर रहा है। ब्रोकरेज फर्म UBS ने रिलायंस पर अपनी ‘खरीदें’ रेटिंग बरकरार रखी है और ₹1,820 का टारगेट प्राइस दिया है। UBS का मानना है कि कंपनी की क्रूड सोर्सिंग रणनीति भू-राजनीतिक जोखिमों को सीमित रखेगी।
रिलायंस पहले रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी कंपनियों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदती थी। लेकिन अब अमेरिकी सेकेंडरी सैंक्शन के डर से कंपनी ने इनसे भी दूरी बना ली है। अमेरिका ने इन कंपनियों पर 22 अक्टूबर को प्रतिबंध लगाए थे और 21 नवंबर तक पुराने सौदों को खत्म करने की डेडलाइन दी थी।
क्या आगे भी दिखेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस जैसी बड़ी कंपनी के पास विकल्पों की कमी नहीं है। कंपनी पहले भी ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों से तेल आयात बंद कर चुकी है। ऐसे में यह बदलाव कंपनी के लिए नया नहीं है। हां, कच्चे तेल की लागत थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन इसका असर सीमित रहने की उम्मीद है।
निष्कर्ष:
रिलायंस इंडस्ट्रीज का यह कदम एक रणनीतिक फैसला है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों और निवेश सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। निवेशकों के लिए घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन बाजार की चाल पर नजर बनाए रखना ज़रूरी होगा।

