राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) आज के समय में रिटायरमेंट प्लानिंग का एक लोकप्रिय विकल्प बन चुकी है। यह एक स्वैच्छिक, बाजार-आधारित योजना है जिसे पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) संचालित करती है। इसमें निवेशक नियमित योगदान करके इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज में पैसा लगाते हैं और रिटायरमेंट के लिए एक कॉर्पस तैयार करते हैं।
NPS में दो तरह के खाते होते हैं – Tier 1 और Tier 2। दोनों में निवेश के विकल्प तो समान हैं, लेकिन नियम, टैक्स लाभ और निकासी की शर्तें अलग-अलग हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि इन दोनों खातों में क्या फर्क है और किसमें निवेश करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
Tier 1: टैक्स बचत वाला अनिवार्य खाता
Tier 1 NPS का मूल खाता है और इसे खास तौर पर लंबी अवधि की रिटायरमेंट बचत के लिए बनाया गया है।
- टैक्स लाभ:
- सेक्शन 80CCD(1) के तहत 80C की सीमा में ₹1.5 लाख तक की छूट।
- अतिरिक्त ₹50,000 की छूट सिर्फ NPS के लिए सेक्शन 80CCD(1B) में।
- नियोक्ता का योगदान (बेसिक + DA का 10% तक) – सेक्शन 80CCD(2) में पूरी तरह टैक्स-फ्री।
- न्यूनतम योगदान: सालाना सिर्फ ₹1,000।
- निकासी के नियम:
- 3 साल बाद ही आंशिक निकासी संभव है, जैसे शादी, शिक्षा, इलाज या घर खरीदने के लिए।
- 60 साल की उम्र पर 60% तक टैक्स-फ्री निकासी की अनुमति है।
- कम से कम 40% राशि से एन्युइटी खरीदना अनिवार्य है।
- अगर 60 साल से पहले निकासी करते हैं तो कम से कम 80% राशि एन्युइटी में लगानी होगी।
निष्कर्ष: Tier 1 उन लोगों के लिए है जो टैक्स बचत के साथ रिटायरमेंट कॉर्पस बनाना चाहते हैं।
Tier 2: वैकल्पिक और लचीला खाता
Tier 2 को आप तभी खोल सकते हैं जब आपके पास Tier 1 खाता हो। यह म्यूचुअल फंड जैसा है और पूरी तरह लिक्विड है।
- न्यूनतम योगदान: ₹250।
- निकासी: इसमें कोई लॉक-इन नहीं है। आप कभी भी पैसा निकाल सकते हैं।
- टैक्स लाभ:
- आम निवेशकों को कोई टैक्स छूट नहीं है।
- अपवाद के रूप में केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों को Tier 2 में भी 80C की छूट मिलती है, लेकिन इसके लिए 3 साल का लॉक-इन जरूरी है।
निष्कर्ष: Tier 2 उन लोगों के लिए है जो अतिरिक्त निवेश करना चाहते हैं और जिन्हें पैसे की लिक्विडिटी चाहिए।
दोनों खातों का अंतर – एक नजर में
| पहलू | Tier 1 खाता | Tier 2 खाता |
|---|---|---|
| अनिवार्यता | जरूरी | वैकल्पिक |
| टैक्स लाभ | हां, 80C और 80CCD में | नहीं (सिवाय सरकारी कर्मचारियों के) |
| निकासी | सख्त नियम, 60 साल पर ही पूरी निकासी | पूरी तरह लचीला, कभी भी निकासी |
| न्यूनतम योगदान | ₹1,000 सालाना | ₹250 |
| उद्देश्य | रिटायरमेंट बचत | अतिरिक्त निवेश/लिक्विडिटी |
निवेशकों के लिए कौन सा बेहतर?
- अगर आपका लक्ष्य रिटायरमेंट बचत और टैक्स छूट है, तो Tier 1 सबसे अच्छा विकल्प है।
- अगर आप पहले से Tier 1 में निवेश कर रहे हैं और चाहते हैं कि कुछ पैसा लिक्विड रहे जिसे आप कभी भी निकाल सकें, तो Tier 2 भी खोल सकते हैं।
- कई लोग Tier 2 को NPS के अंदर म्यूचुअल फंड जैसा मानते हैं और इसका इस्तेमाल शॉर्ट-टर्म निवेश के लिए करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न: क्या दोनों खाते खोलना जरूरी है?
उत्तर: नहीं। NPS में निवेश के लिए Tier 1 अनिवार्य है। Tier 2 पूरी तरह वैकल्पिक है।
प्रश्न: क्या Tier 2 से Tier 1 में पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं। Tier 2 से Tier 1 में ट्रांसफर की अनुमति नहीं है। टैक्स छूट सिर्फ Tier 1 में नए योगदान पर ही मिलती है।
प्रश्न: क्या Tier 2 को म्यूचुअल फंड की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है?
उत्तर: हां, इसमें कोई लॉक-इन नहीं है और आप कभी भी पैसा निकाल सकते हैं।
निष्कर्ष
NPS Tier 1 vs Tier 2 को समझना निवेशकों के लिए जरूरी है। Tier 1 लंबी अवधि की रिटायरमेंट बचत और टैक्स छूट के लिए सबसे उपयुक्त है। वहीं Tier 2 उन लोगों के लिए है जो लचीलेपन के साथ अतिरिक्त निवेश करना चाहते हैं।
अगर आप नौकरीपेशा हैं और टैक्स बचत चाहते हैं तो Tier 1 से शुरुआत करें। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि कुछ पैसा तुरंत उपलब्ध रहे, तो Tier 2 भी खोल सकते हैं। इस तरह दोनों खातों का संतुलित इस्तेमाल करके आप अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग और शॉर्ट-टर्म निवेश दोनों को सुरक्षित बना सकते हैं।

