आज के समय में Mutual Fund SIP निवेश का एक लोकप्रिय तरीका बन चुका है। छोटे-छोटे निवेश से लंबे समय में बड़ा फंड तैयार करने का सबसे आसान तरीका SIP ही है। इसमें निवेशक हर महीने तय राशि डालते हैं और धीरे-धीरे कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। लेकिन इस लाभ को पाने के लिए एक जरूरी शर्त है—बीच में पैसा न निकालना।
कंपाउंडिंग क्या है?
कंपाउंडिंग का मतलब है कि आपके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी मूल निवेश में जुड़ जाता है। यानी आपको सिर्फ निवेश पर ही नहीं, बल्कि रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता है। यही वजह है कि समय के साथ आपका फंड तेजी से बढ़ता है। इसे अक्सर “रिटर्न पर रिटर्न” कहा जाता है।
SIP में कंपाउंडिंग का असर
जब आप SIP के जरिए निवेश करते हैं, तो हर महीने की राशि आपके फंड में जुड़ती रहती है। समय के साथ यह राशि कंपाउंडिंग के जरिए बढ़ती जाती है। लेकिन अगर आप बीच में पैसा निकाल लेते हैं, तो कंपाउंडिंग का चक्र टूट जाता है और आपको पूरा फायदा नहीं मिल पाता।
उदाहरण से समझें
मान लीजिए आप 25 साल की उम्र में 5,000 रुपये प्रति माह SIP शुरू करते हैं और 10% रिटर्न मिलता है। अगर आप 30 साल तक निवेश जारी रखते हैं, तो आपका फंड लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। लेकिन अगर आप 10 साल बाद पैसा निकाल लेते हैं, तो यह रकम घटकर करीब 30 लाख रुपये ही रह जाएगी। यानी लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने से ही कंपाउंडिंग का असली असर दिखता है।
कब न निकालें पैसा?
निवेश अवधि के अंतिम फेज में आपका फंड सबसे तेजी से बढ़ता है। यही वह समय होता है जब कंपाउंडिंग का असली फायदा मिलता है। अगर आप इस फेज में पैसा निकालते हैं, तो आपके रिटर्न पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसलिए जानकार सलाह देते हैं कि SIP को लंबी अवधि तक जारी रखें और बीच में विदड्रॉअल से बचें।
निष्कर्ष
MF SIP Investment उन लोगों के लिए बेहतर है जो अनुशासन के साथ लंबे समय तक निवेश करना चाहते हैं। कंपाउंडिंग का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब आप निवेश को बीच में न तोड़ें। इसलिए अगर आप SIP कर रहे हैं, तो इसे लंबी अवधि तक बनाए रखें और अंतिम फेज में पैसा निकालने से बचें।

