भारत में हाल ही में लागू किए गए चार नए लेबर कोड (New Labour Code 2025) को लेकर एक अहम रिपोर्ट सामने आई है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताज़ा स्टडी के अनुसार, इन सुधारों से मध्यम अवधि में बेरोजगारी दर 1.3% तक कम हो सकती है। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले वर्षों में लगभग 77 लाख नए रोजगार (Job Creation in India) सृजित होंगे।
रोजगार सृजन और खपत में बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट और शहरी-ग्रामीण वर्किंग एज पॉपुलेशन को देखते हुए इन सुधारों से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्या कांति घोष ने बताया कि लगभग 30% सेविंग रेट के साथ नए नियम लागू होने से प्रति व्यक्ति खपत में 66 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोतरी होगी। इससे कुल मिलाकर 75,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त उपभोग जुड़ सकता है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
रिपोर्ट में कहा गया है कि नए लेबर कोड से कर्मचारी और उद्यम दोनों सशक्त होंगे। इससे एक ऐसा वर्कफोर्स तैयार होगा जो भारत को आत्मनिर्भर राष्ट्र (Aatmanirbhar Bharat) बनाने में मदद करेगा। देश में फिलहाल 44 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जिनमें से 31 करोड़ ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं। अगर इनमें से 20% लोग फॉर्मल पे रोल में शिफ्ट होते हैं तो करीब 10 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
लेबर मार्केट का औपचारिकरण
पीएलएफएस डेटासेट के अनुसार, भारत में फिलहाल फॉर्मल वर्कर्स की भागीदारी 60.4% है। नए लेबर कोड लागू होने के बाद यह दर 15% से अधिक बढ़ सकती है, जिससे लेबर मार्केट फॉर्मलाइजेशन 75.5% तक पहुंच जाएगा। इसका मतलब है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं मिलेंगी।
निष्कर्ष
नए लेबर कोड सिर्फ रोजगार सृजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने, उपभोग में इजाफा करने और श्रम बाजार को औपचारिक बनाने में भी अहम भूमिका निभाएंगे। आने वाले 2-3 वर्षों में इनका असर भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर साफ दिखाई देगा।

