New Labour Code 2025 के लागू होने के बाद कर्मचारियों के लिए एक बड़ा बदलाव आया है। अब अगर कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है या उसे कंपनी से निकाला जाता है, तो कंपनी को उसका Full and Final Settlement (FnF) सिर्फ दो वर्किंग डेज के भीतर करना होगा। पहले यह प्रक्रिया 30 से 45 दिन तक खिंच जाती थी, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
नया नियम क्या कहता है?
कोड ऑन वेजेज, 2019 के सेक्शन 17(2) के तहत, सभी कर्मचारियों को उनकी आखिरी सैलरी और अन्य बकाया राशि दो वर्किंग डेज के भीतर मिलनी चाहिए। इसमें इस्तीफा, छंटनी, नौकरी से निकाले जाने या कंपनी बंद होने जैसी सभी स्थितियां शामिल हैं। यानी अब चाहे कर्मचारी फिक्स्ड-टर्म पर हो या परमानेंट, सभी पर यह नियम समान रूप से लागू होगा।
पहले क्या होता था?
पुराने सिस्टम में कंपनियां अक्सर ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और अन्य बकाया को मिलाकर एक लंबी प्रक्रिया अपनाती थीं। कई बार कर्मचारियों को महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। नए लेबर कोड का मकसद इस देरी को खत्म करना है और कर्मचारियों को समय पर उनका हक दिलाना है।
कर्मचारियों को होगा सीधा फायदा
- जल्दी भुगतान मिलने से आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी।
- नौकरी बदलने के दौरान पैसों की तंगी से राहत मिलेगी।
- कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी और अनावश्यक देरी रोकी जा सकेगी।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
BTG Advaya के पार्टनर अर्जुन पलेरी और लक्ष्मीकुमारन एवं श्रीधरन अटॉर्नीज के एग्जीक्यूटिव पार्टनर आशीष फिलिप का कहना है कि नया वेज कोड सभी तरह की नौकरी की स्थितियों में एक समान नियम लागू करता है। यह बदलाव कर्मचारियों के लिए बेहद सकारात्मक है क्योंकि अब उन्हें अपनी आखिरी सैलरी और बकाया राशि समय पर मिल जाएगी।
निष्कर्ष
Labour Code Update से साफ है कि अब कंपनियों को कर्मचारियों का फुल एंड फाइनल सेटलमेंट दो दिन में करना होगा। यह नियम कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है और कार्यस्थल पर पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाने में मदद करेगा।

