भारत में लंबे समय से लागू पुराने श्रम कानूनों को बदलकर सरकार ने नया और सरल Labour Code 2025 लागू किया है। इसका उद्देश्य कंपनियों और कर्मचारियों दोनों के लिए कामकाज को आसान बनाना है। नए प्रावधानों से जहां मालिकों को फैसले लेने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, वहीं कर्मचारियों के लिए भी कई बदलाव देखने को मिलेंगे।
कंपनियों को मिले नए अधिकार
नए लेबर कोड के तहत अब 300 से कम कर्मचारियों वाली फैक्ट्री बंद करने, छंटनी करने या लेऑफ करने के लिए सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। इससे कंपनियां तेजी से निर्णय ले सकेंगी और कारोबार में लचीलापन बढ़ेगा।
इसके अलावा, कागजी कामकाज में भी बड़ी कटौती की गई है। पहले जहां 37 तरह के फॉर्म भरने पड़ते थे, अब यह घटकर 18 रह गए हैं। इसी तरह, रजिस्टर की संख्या भी घटाकर शून्य कर दी गई है।
कर्मचारियों पर असर
कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव हड़ताल से जुड़ा है। अब अचानक हड़ताल करना संभव नहीं होगा। मजदूरों को कम से कम 14 दिन पहले नोटिस देना होगा ताकि उत्पादन प्रभावित न हो।
छोटी-मोटी गलतियों पर अब जेल नहीं होगी, बल्कि जुर्माना भरकर मामला निपटाया जा सकेगा। पहली बार गलती होने पर 50-75% जुर्माना देकर केस खत्म किया जा सकता है।
इसके अलावा, अब विवाद सीधे ट्रिब्यूनल में जा सकेंगे। पहले सरकार की मंजूरी पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे मामलों में सालों की देरी होती थी।
संतुलन बनाने की कोशिश
सरकार का कहना है कि उद्योग और मजदूर दोनों की सफलता एक-दूसरे से जुड़ी है। उद्योग बढ़ेंगे तो रोजगार और सामाजिक सुरक्षा बढ़ेगी, वहीं सुरक्षित और प्रेरित कार्यबल से उत्पादकता और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। नए लेबर कोड का मकसद इसी संतुलन को बनाए रखना है।
SOURCE- PIB
निष्कर्ष
Labour Code 2025 से कंपनियों को अधिक अधिकार मिले हैं, जिससे वे तेजी से फैसले ले पाएंगी। कर्मचारियों के लिए भी नियम स्पष्ट हुए हैं, जिससे विवादों का समाधान जल्दी हो सकेगा। कुल मिलाकर, यह बदलाव उद्योग और श्रमिक दोनों के लिए कामकाज को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

