सरकार ने हाल ही में ग्रेच्युटी नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे कर्मचारियों को पहले से ज्यादा लाभ मिलेगा। पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल की लगातार नौकरी जरूरी थी, लेकिन अब नए लेबर कोड के तहत यह अवधि घटाकर 1 साल कर दी गई है। इसका मतलब है कि अगर कोई कर्मचारी सिर्फ एक साल भी नौकरी करता है और कंपनी छोड़ देता है, तो उसे ग्रेच्युटी का हक मिलेगा।
ग्रेच्युटी कैसे होती है कैलकुलेट?
ग्रेच्युटी की गणना एक तय फॉर्मूले से होती है:
ग्रेच्युटी = (आखिरी सैलरी × 15 × सर्विस के साल) ÷ 26
यहां “आखिरी सैलरी” में बेसिक पे और महंगाई भत्ता (DA) शामिल होता है। हर पूरे साल की सर्विस के लिए 15 दिन की सैलरी गिनी जाती है। अगर कर्मचारी ने आखिरी साल में छह महीने से ज्यादा काम किया है, तो उसे अगले पूरे साल में राउंड अप कर दिया जाता है।
1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी
मान लीजिए किसी कर्मचारी की आखिरी सैलरी ₹30,000 है और उसने 1 साल काम किया है।
ग्रेच्युटी = (30,000 × 15 × 1) ÷ 26
ग्रेच्युटी = ₹17,307
यानी एक साल की नौकरी पर उसे लगभग सत्रह हजार रुपये मिलेंगे।
3 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी
अब मान लीजिए किसी कर्मचारी ने 3 साल काम किया और उसकी आखिरी सैलरी ₹40,000 है।
ग्रेच्युटी = (40,000 × 15 × 3) ÷ 26
ग्रेच्युटी = ₹69,230
यानी तीन साल की नौकरी के बाद उसे करीब उनहत्तर हजार रुपये मिलेंगे।
कर्मचारियों को क्या फायदा?
नए नियम से फिक्स्ड-टर्म और प्रोजेक्ट-बेस्ड कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। इससे उन्हें नौकरी छोड़ने पर वित्तीय सुरक्षा मिलेगी। लंबे समय में यह बदलाव कर्मचारियों के लिए बचत और रिटायरमेंट प्लानिंग को मजबूत करेगा।

