बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।सोने की कीमतें (Gold Prices) एक बार फिर चर्चा में हैं। दिवाली के बाद से इसमें गिरावट देखने को मिली है, लेकिन निवेशकों की नजर अब भी Gold Investment के सही मौके पर टिकी है।
पिछले महीने 17 अक्टूबर को सोना सर्राफा बाजार में ₹1,30,874 प्रति 10 ग्राम तक पहुंचा था, जो इसका ऑल टाइम हाई है। लेकिन 28 अक्टूबर को यह ₹1,19,164 तक गिर गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या Gold Market Trend फिर से 1980 या 2008 जैसा कोई बड़ा बदलाव दिखाएगा?
Gold Price History: कब-कब आई बड़ी तेजी?
पिछले 50 सालों में सोने में तीन बार बड़ी तेजी देखने को मिली है।
- पहली बार 1970 से 1980 के बीच सोने ने करीब 1875% का रिटर्न दिया (Gold Price 1980)।
- दूसरी बार 2001 से 2011 के बीच सोने ने 593% का रिटर्न दिया (Gold Price 2008)।
- तीसरी बार 2018 से अब तक सोने ने लगभग 300% का रिटर्न दिया है (Gold Return History)।
इन सभी दौरों में जियोपॉलिटिकल टेंशन, डॉलर की कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता जैसे फैक्टर्स ने अहम भूमिका निभाई।
कब-कब आई गिरावट?
- 1980 के बाद 1985 तक सोने में करीब 68% की गिरावट आई।
- 2011 के बाद 2-3 साल में सोना 45% तक टूटा।
- 2021 में भी सोने में 22% की करेक्शन देखी गई (सोने में गिरावट)।
क्या फिर दोहराएगा इतिहास?
Ajay Kedia Advisory के फाउंडर अजय केडिया का कहना है कि Gold Rate में हर बार औसतन 9 साल की तेजी के बाद 2-3 साल की गिरावट आती है।
उनके मुताबिक, रूस-यूक्रेन युद्ध, ट्रेड डील्स और ब्याज दरों जैसे फैक्टर्स अब धीरे-धीरे स्थिर हो रहे हैं, जिससे सोने में तेजी (सोने में तेजी) थम सकती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
अगर आप Gold Investment की सोच रहे हैं, तो यह वक्त सतर्क रहने का है। Gold Market Trend के हिसाब से लॉन्ग टर्म नजरिया और सही एंट्री पॉइंट पर ध्यान देना जरूरी है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।)

