भारत में विदेशी बैंकों के संचालन को लेकर एक अहम बैठक 20 नवंबर को वित्त मंत्रालय की अंतर विभागीय समिति (IDC) के तहत आयोजित की गई। इस बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा प्रस्तावित नए नियमों की समीक्षा की गई, जिनका उद्देश्य भारत में विदेशी बैंकों के विस्तार को आसान बनाना है।
बैठक की अध्यक्षता वित्तीय मामलों के सचिव एम. नागराजू ने की। इसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। चर्चा का मुख्य विषय था—विदेशी बैंकों को भारत में ब्रांच, प्रतिनिधि कार्यालय या सहायक कंपनियां खोलने की अनुमति देना।
RBI का प्रस्ताव क्या कहता है?
RBI ने हाल ही में एक ड्राफ्ट नीति जारी की है जिसमें विदेशी बैंकों के लिए भारत में काम करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के सुझाव दिए गए हैं। इसमें वित्तीय पात्रता की शर्तों को आसान करना और अनुमति प्रक्रिया को तेज करने की बात कही गई है। इस ड्राफ्ट में पारस्परिकता के सिद्धांत का भी उल्लेख है—यानी जिन देशों में भारतीय बैंकों को विस्तार की सुविधा मिलती है, उन्हीं देशों के बैंकों को भारत में भी वैसा ही अवसर मिलेगा।
भारतीय बैंकों के विदेश विस्तार पर भी चर्चा
बैठक में भारतीय बैंकों के विदेशों में ब्रांच या प्रतिनिधि कार्यालय खोलने के प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। यह कदम भारत की वैश्विक बैंकिंग उपस्थिति को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है। साथ ही, कुछ विदेशी बैंकों द्वारा भारत में अपनी मौजूदा ब्रांचों को स्थानांतरित करने के अनुरोधों पर भी विचार किया गया।
अमेरिका से जुड़े कारोबारी संकेत
बैठक के संदर्भ में यह भी माना जा रहा है कि RBI की यह पहल भारत और अमेरिका के बीच चल रही कारोबारी बातचीत से जुड़ी हो सकती है। अमेरिकी वित्तीय संस्थान भारत में अपने विस्तार को लेकर उत्सुक हैं, जबकि भारत सरकार इस दिशा में संतुलित और सुरक्षा-संबंधी दृष्टिकोण अपनाना चाहती है।
इस बैठक को भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और वैश्विक बैंकिंग सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

