कई कर्मचारियों के मन में यह सवाल आता है कि अगर उनकी कंपनी पर PF Act लागू नहीं होता, तो क्या वे खुद से EPF (Employee Provident Fund) का सदस्य बन सकते हैं? इसको लेकर ईपीएफओ (EPFO Rule 2025) का नियम बिल्कुल साफ है—जब तक कंपनी PF एक्ट के दायरे में नहीं आती, तब तक कर्मचारी व्यक्तिगत तौर पर EPF से नहीं जुड़ सकते।
EPF कब लागू होता है?
भारत में EPF एक सोशल सिक्योरिटी स्कीम है, जो कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग के लिए बनाई गई है। लेकिन यह तभी लागू होती है जब किसी कंपनी में कम से कम 20 कर्मचारी काम कर रहे हों। इसके अलावा सरकार चाहे तो किसी छोटे संस्थान को भी PF एक्ट के दायरे में ला सकती है।
कर्मचारी खुद से क्यों नहीं जुड़ सकते?
EPF सिस्टम में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान जरूरी होता है। यह स्कीम किसी एक कर्मचारी की इच्छा पर आधारित नहीं है। अगर कंपनी PF एक्ट के तहत रजिस्टर्ड नहीं है, तो कर्मचारी खुद से PF अकाउंट नहीं खुलवा सकते। सदस्यता तभी मिलती है जब पूरा संस्थान एक्ट के दायरे में आता है।
छोटी कंपनियों के लिए विकल्प
अगर आपकी कंपनी में 20 से कम कर्मचारी हैं, तो भी EPF से जुड़ने का विकल्प मौजूद है। यह व्यवस्था कानून के सेक्शन 1(4) के तहत आती है, जिसे वॉलंटरी कवरेज कहा जाता है। मतलब, अगर कर्मचारी और नियोक्ता दोनों सहमत हों, तो कंपनी EPFO को आवेदन भेज सकती है। मंजूरी मिलने पर सभी कर्मचारियों को PF नंबर मिल जाता है।
कर्मचारियों की पहल भी जरूरी
अगर कंपनी के ज्यादातर कर्मचारी EPF से जुड़ना चाहते हैं और मालिक भी तैयार है, तो संस्था EPFO को आवेदन कर सकती है। इस प्रक्रिया से छोटे दफ्तरों, दुकानों, सर्विस सेंटर, ट्रैवल एजेंसियों या फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी PF की सुविधा मिल सकती है।
निष्कर्ष
EPFO Rule 2025 के अनुसार, PF कोई वैकल्पिक स्कीम नहीं बल्कि कानून के तहत लागू होने वाली सुविधा है। इसलिए EPF से जुड़ने के लिए कंपनी का रजिस्टर्ड होना जरूरी है। अगर आपकी कंपनी PF एक्ट के दायरे में नहीं आती, तो व्यक्तिगत तौर पर सदस्य बनना संभव नहीं है। लेकिन वॉलंटरी कवरेज के जरिए छोटी कंपनियों के कर्मचारी भी इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

