टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। गूगल का नया AI मॉडल Nano Banana Pro इन दिनों चर्चा में है। यह मॉडल हाई क्वालिटी इमेज बनाने और टेक्स्ट को विजुअल फॉर्म में बदलने की क्षमता रखता है। लेकिन अब इस तकनीक को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह AI टूल बेहद रियलिस्टिक नकली आधार और पैन कार्ड जैसी संवेदनशील डॉक्यूमेंट्स भी तैयार कर रहा है।
क्यों बढ़ा विवाद?
रिसर्चर्स ने जब इस मॉडल को टेस्ट किया तो पाया कि यह बिना किसी चेतावनी के आधार और पैन कार्ड जैसी पहचान से जुड़े डॉक्यूमेंट्स बना देता है। इसमें नकली नाम, जन्मतिथि और आधार-पैन नंबर जैसे दिखने वाले नंबर भी शामिल होते हैं। डिजाइन इतना असली जैसा होता है कि पहचान करना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि अब यह मामला प्राइवेसी, फ्रॉड और साइबर सिक्योरिटी का बड़ा मुद्दा बन गया है।
क्या है Nano Banana Pro?
Nano Banana Pro दरअसल गूगल के Gemini Nano का एडवांस वर्जन है। इसे हाल ही में पेश किया गया है। इस मॉडल से 4K क्वालिटी इमेज तैयार की जा सकती है। साथ ही इसमें कैरेक्टर कंसिस्टेंसी का फीचर है, यानी एक ही चेहरे को अलग-अलग इमेज में एक जैसा दिखाया जा सकता है। यह गूगल सर्च से भी इंटीग्रेटेड है, जिससे इसका इस्तेमाल सोशल मीडिया और डिजाइनिंग में तेजी से बढ़ रहा है।
खतरे और सवाल
- फर्जी डॉक्यूमेंट्स बनना आसान हो गया है
- पहचान पत्रों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है
- फ्रॉड और साइबर क्राइम के मामले बढ़ सकते हैं
- टेक कंपनियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं
निष्कर्ष
AI तकनीक का इस्तेमाल जहां डिजाइन और क्रिएटिव कामों में मददगार है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल गंभीर खतरे पैदा कर सकता है। नकली आधार और पैन कार्ड जैसी चीजें बनना न सिर्फ कानून के खिलाफ है बल्कि आम लोगों की प्राइवेसी और सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। यही वजह है कि अब गूगल जैसी टेक कंपनियों से जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।

