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अदाणी ग्रुप ने JP Associates के अधिग्रहण की दौड़ में बढ़त बनाई, वेदांता पीछे छूटे

नई दिल्ली। दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JP Associates) को खरीदने की होड़ में अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड सबसे आगे निकल आया है। वेदांता ग्रुप, जिसने पहले ₹12,505 करोड़ की ऊंची बोली लगाकर बढ़त बनाई थी, अब पीछे छूट गया है। ऋणदाताओं की समिति (CoC) ने अदाणी की समाधान योजना को सबसे व्यवहारिक और तेज़ माना है, जिससे कंपनी के पुनरुद्धार की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

क्या है पूरा मामला?

जेपी एसोसिएट्स, जो रियल एस्टेट, सीमेंट, ऊर्जा, होटल और सड़क निर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है, जून 2024 में NCLT इलाहाबाद पीठ के आदेश के बाद कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) में शामिल हुआ था। कंपनी पर करीब ₹60,000 करोड़ का कर्ज है और इसकी कई परियोजनाओं में 1000 से अधिक घर खरीदार फंसे हुए हैं।

इस साल अप्रैल में 25 कंपनियों ने अधिग्रहण में रुचि दिखाई थी, लेकिन जून तक सिर्फ पांच कंपनियों ने बयाना राशि के साथ बोली लगाई—अदाणी, वेदांता, डालमिया सीमेंट, जिंदल पावर और पीएनसी इंफ्राटेक

अदाणी की योजना क्यों मानी गई बेहतर?

अदाणी ग्रुप ने ऋणदाताओं को दो साल में भुगतान का प्रस्ताव दिया है, जबकि वेदांता ने पांच साल में किस्तों में भुगतान की बात कही थी। यही वजह रही कि CoC ने अदाणी की योजना को सबसे ऊपर रखा।

डालमिया सीमेंट दूसरे और वेदांता तीसरे स्थान पर रहे। डालमिया की योजना यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के साथ लंबित कानूनी मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर है, जिससे उसकी व्यवहारिकता पर सवाल उठे।

आगे क्या होगा?

अब CoC अगले दो सप्ताह में अदाणी की समाधान योजना पर मतदान कर सकता है। अगर यह योजना पास होती है, तो जेएएल के पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

जेएएल की संपत्तियां और कारोबारी स्थिति

जेपी एसोसिएट्स के पास ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रीन्स, नोएडा विशटाउन, और जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी जैसी प्रमुख रियल एस्टेट परियोजनाएं हैं। ये सभी जेवर एयरपोर्ट के पास स्थित हैं।

इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर, मसूरी और आगरा में होटल संपत्तियां हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में चार सीमेंट प्लांट हैं, हालांकि ये फिलहाल गैर-परिचालन हैं। कंपनी ने जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, यमुना एक्सप्रेसवे टोलिंग, और जयप्रकाश पावर वेंचर्स जैसी सहायक कंपनियों में भी निवेश किया है।

क्या कहता है बाजार?

राष्ट्रीय संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी लिमिटेड (NARCL) भी इस अधिग्रहण प्रक्रिया में सक्रिय है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अध्यक्षता वाले ऋणदाताओं के संघ ने जेएएल के संकटग्रस्त ऋणों को NARCL को ट्रांसफर किया है।

अगर सब कुछ तय समय पर हुआ, तो अदाणी ग्रुप का यह अधिग्रहण न सिर्फ जेएएल के लिए राहत लेकर आएगा, बल्कि दिल्ली-एनसीआर रियल एस्टेट मार्केट में भी स्थिरता ला सकता है।


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