नई दिल्ली। सहारा इंडिया ग्रुप से जुड़े निवेशकों और कर्मचारियों के लिए सोमवार का दिन अहम हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट में कल उन याचिकाओं पर सुनवाई होगी जिनमें निवेश की वापसी और लंबित वेतन भुगतान की मांग की गई है।
सहारा ग्रुप की कंपनियों पर लंबे समय से निवेशकों की रकम लौटाने और कर्मचारियों की सैलरी रोकने के आरोप हैं। अब अदालत इस पूरे मामले में केंद्र सरकार, सेबी और अन्य पक्षों से जवाब मांग चुकी है।
क्या है मामला?
सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SICCL) ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसमें उसने अपनी 88 संपत्तियों को Adani Properties Pvt. Ltd. को बेचने की अनुमति मांगी है। यह बिक्री निवेशकों को रिफंड देने के लिए जरूरी बताई जा रही है।
इसके साथ ही कई कर्मचारियों ने भी अदालत में याचिका लगाई है कि उन्हें महीनों से वेतन नहीं मिला है। शुक्रवार को वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया कि इन याचिकाओं को भी सोमवार को सुना जाए।
क्या कह रही है अदालत?
कोर्ट ने एमिकस क्यूरी को निर्देश दिया है कि वह इन संपत्तियों की प्रकृति की जांच करे—क्या वे विवादित हैं या साफ-सुथरी। साथ ही, कर्मचारियों के वेतन दावों की भी जांच की जाएगी।
वित्त और सहकारिता मंत्रालयों को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है। सभी संबंधित याचिकाएं 17 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।
सहारा घोटाले की पृष्ठभूमि
सहारा इंडिया की शुरुआत 1978 में हुई थी। एक समय यह देश की सबसे बड़ी चिटफंड कंपनियों में से एक थी। लेकिन 2011 में सेबी ने इसकी जांच शुरू की और मामला देश के सबसे बड़े वित्तीय विवादों में शामिल हो गया।
अब अदाणी ग्रुप की भूमिका इस संकट को सुलझाने में अहम मानी जा रही है।

