घर खरीदना आज सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि एक ज़रूरी फैसला बन चुका है। खासकर शहरों में जहां किराए के मकान में रहना हर महीने की बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में होम लोन लेना एक आम विकल्प है, लेकिन सवाल यही रहता है—मेरी सैलरी के हिसाब से मुझे कितना लोन मिल सकता है?
EMI/NMI रेश्यो क्या होता है?
बैंक आपकी सैलरी के आधार पर यह तय करता है कि आपकी मासिक किस्त (EMI) आपकी इनकम का कितना हिस्सा होगी। इसे EMI/NMI रेश्यो कहा जाता है। आमतौर पर बैंक 50–55% तक की लिमिट रखते हैं। यानी अगर आपकी सैलरी ₹40,000 है, तो आपकी EMI ₹20,000 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
मल्टीप्लायर तरीका
कुछ बैंक आपकी सैलरी को 72 से गुणा करके लोन अमाउंट तय करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपकी सैलरी ₹30,000 है, तो आपको ₹21.60 लाख तक का लोन मिल सकता है। यह तरीका आसान है लेकिन हर बैंक इसे नहीं अपनाता।
ब्याज दर और लोन अवधि
ब्याज दर जितनी कम होगी, EMI उतनी ही कम रहेगी। साथ ही अगर आप लोन की अवधि बढ़ाते हैं, तो मासिक किस्त और EMI/NMI रेश्यो भी कम हो जाता है।
LTV रेश्यो क्या बताता है?
Loan-to-Value (LTV) रेश्यो यह बताता है कि आपने प्रॉपर्टी की कितनी कीमत लोन से चुकाई है। अगर यह रेश्यो ज्यादा है, तो बैंक के लिए जोखिम बढ़ जाता है।
और किन बातों का ध्यान रखें?
बैंक आपकी उम्र, नौकरी की स्थिरता, क्रेडिट स्कोर और इनकम स्टेबिलिटी को भी ध्यान में रखते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले इन सभी पहलुओं को समझना जरूरी है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। लोन लेने से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।)

