भारतीय बाजार में मोटरसाइकिलों में अब कई ऐसे फीचर्स आने लगे हैं जो पहले सिर्फ महंगी विदेशी बाइक्स में देखने को मिलते थे। इनमें से एक है Cruise Control। यह फीचर खासतौर पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले राइडर्स के लिए बनाया गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्रूज कंट्रोल होता क्या है, यह मोटरसाइकिल में कैसे काम करता है और भारतीय सड़कों पर यह कितना उपयोगी साबित हो सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं।
Cruise Control क्या है?
क्रूज कंट्रोल एक ऐसा सिस्टम है जो आपकी बाइक की स्पीड को स्थिर बनाए रखता है। जब आप इसे ऑन करते हैं और एक तय गति सेट करते हैं, तो बाइक उसी स्पीड पर चलती रहती है। इसका फायदा यह है कि आपको लगातार थ्रॉटल पकड़े रखने की जरूरत नहीं होती। लंबी दूरी की यात्रा के दौरान यह हाथ और कलाई की थकान को कम करता है।
Cruise Control के प्रकार
मोटरसाइकिलों में क्रूज कंट्रोल दो तरह का होता है:
- मैकेनिकल थ्रॉटल लॉक
- इसमें थ्रॉटल को एक जगह पर लॉक कर दिया जाता है।
- यह सिस्टम सरल होता है लेकिन उतना सुरक्षित नहीं माना जाता।
- पुराने मॉडल की बाइक्स में यह ज्यादा देखने को मिलता है।
- इलेक्ट्रॉनिक क्रूज कंट्रोल
- इसमें सेंसर, माइक्रोचिप और ECU (इंजन कंट्रोल यूनिट) का इस्तेमाल होता है।
- जब आप क्रूज कंट्रोल ऑन करते हैं, तो ECU खुद स्पीड को नियंत्रित करता है।
- ब्रेक, क्लच या थ्रॉटल का हल्का सा स्पर्श भी इसे तुरंत बंद कर देता है।
- यह सिस्टम ज्यादा सुरक्षित और आधुनिक माना जाता है।
कैसे करता है काम?
नई मोटरसाइकिलों में राइड-बाय-वायर तकनीक का इस्तेमाल होता है। इसमें थ्रॉटल सीधे इंजन से जुड़ा नहीं होता, बल्कि सेंसर ECU को संकेत भेजते हैं। ECU तय करता है कि इंजन को कितनी फ्यूल सप्लाई करनी है ताकि बाइक उसी स्पीड पर चलती रहे।
जैसे ही आप ब्रेक या क्लच दबाते हैं, सिस्टम तुरंत बंद हो जाता है। यानी किसी भी आपात स्थिति में बाइक का कंट्रोल तुरंत आपके हाथ में आ जाता है।
भारतीय सड़कों पर कितना उपयोगी?
भारत में ट्रैफिक, गड्ढे और अनियमित सड़कें आम हैं। ऐसे में शहर के अंदर क्रूज कंट्रोल का फायदा लगभग नहीं के बराबर है। लेकिन हाईवे और एक्सप्रेसवे पर यह फीचर काफी उपयोगी साबित होता है।
- लंबी दूरी तय करते समय यह थकान कम करता है।
- अनजाने में स्पीड बढ़ने से बचाता है।
- राइडिंग अनुभव को आरामदायक बनाता है।
पहले यह फीचर सिर्फ महंगी विदेशी मोटरसाइकिलों में मिलता था, लेकिन अब KTM, Hero और TVS जैसी कंपनियां इसे अपनी किफायती बाइक्स में भी दे रही हैं।
सुरक्षा के मामले में कितना भरोसेमंद?
क्रूज कंट्रोल सिर्फ स्पीड संभालता है, यह ब्रेकिंग या स्टेयरिंग का ध्यान नहीं रखता। इसलिए सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
- इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में सेफ्टी चेक होते हैं।
- ब्रेक, क्लच या थ्रॉटल छूते ही सिस्टम बंद हो जाता है।
- मैकेनिकल थ्रॉटल लॉक उतना सुरक्षित नहीं होता, इसलिए इसे इस्तेमाल करते समय सावधानी जरूरी है।
राइडर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपनी बाइक के क्रूज कंट्रोल सिस्टम को अच्छी तरह समझें, मैनुअल पढ़ें और पहले इसे सुरक्षित जगह पर टेस्ट करें।
क्या आपको Cruise Control वाली बाइक लेनी चाहिए?
अगर आपकी राइडिंग ज्यादातर हाईवे पर होती है, लंबे कम्यूट या वीकेंड टूरिंग करते हैं, तो क्रूज कंट्रोल आपके लिए एक उपयोगी फीचर साबित हो सकता है। यह आपके हाथ, कलाई और शरीर की थकान कम करता है और राइडिंग को आरामदायक बनाता है।
लेकिन अगर आपका रोजमर्रा का सफर शहर की ट्रैफिक, गड्ढों और सिग्नलों में ही बीतता है, तो यह फीचर शायद आपके काम का नहीं होगा।
निष्कर्ष
क्रूज कंट्रोल तकनीक मोटरसाइकिलों में एक आधुनिक और प्रीमियम फीचर है। यह हाईवे पर लंबी दूरी की यात्रा को आसान और आरामदायक बनाता है। हालांकि शहर की ट्रैफिक में इसका उपयोग सीमित है, लेकिन टूरिंग और हाईवे राइडिंग करने वालों के लिए यह फीचर काफी मददगार है।

