भारत में लागू हुए नए श्रम संहिताओं (New Labour Codes) से कर्मचारियों और गिग वर्कर्स दोनों को बड़ा फायदा मिलने वाला है। इन बदलावों का असर सीधे तौर पर प्रोविडेंट फंड (PF), ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल कर्मचारियों की फाइनेंशियल सिक्योरिटी मजबूत होगी, बल्कि कई सेक्टरों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
PF और Gratuity पर असर
नए लेबर कोड के तहत बेसिक वेतन को कुल वेतन का कम से कम 50% रखा गया है। इसका सीधा असर कर्मचारियों के PF और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा। अब कंपनियों को ज्यादा योगदान करना होगा, जिससे कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय पहले से अधिक ग्रेच्युटी मिलेगी। PF में भी बढ़ोतरी होगी, जो लंबे समय में बचत और सुरक्षा को मजबूत बनाएगी।
गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा
गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार कानूनी परिभाषा दी गई है। अब उन्हें PF, ग्रेच्युटी और बीमा जैसी सुविधाएं मिलेंगी। कंपनियों को अपने सालाना टर्नओवर का 1-2% सामाजिक सुरक्षा कोष में देना होगा। इससे फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स, ट्रांसपोर्टेशन और IT सेक्टर से जुड़े लाखों वर्कर्स को स्थिरता मिलेगी।
रोजगार के नए अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि नए लेबर कोड से IT, ट्रांसपोर्टेशन, ट्रेवल-टूरिज्म और स्टार्टअप्स जैसे सेक्टरों में रोजगार बढ़ेगा। गिग वर्कर्स की संख्या पहले ही तेजी से बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में यह और बढ़ेगी। अनुमान है कि 2030 तक गिग इकॉनॉमी का योगदान भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 1.25% तक पहुंच सकता है।
स्टार्टअप्स को फायदा
स्टार्टअप्स में ज्यादातर नौकरियां गिग वर्क के रूप में होती हैं। सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान इन वर्कर्स को स्थिरता देगा और स्टार्टअप्स को भी लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद करेगा।
निष्कर्ष
नए लेबर कोड से कर्मचारियों के PF और ग्रेच्युटी में इजाफा होगा और गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। IT और ट्रांसपोर्टेशन जैसे सेक्टरों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

