मोदी सरकार ने हाल ही में चार नए श्रम संहिताओं को अधिसूचित किया है, जिनसे गिग इकॉनॉमी में बड़ा बदलाव आने वाला है। पहली बार गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी परिभाषा दी गई है। इसका सीधा असर उन लाखों लोगों पर पड़ेगा जो फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स, राइड-शेयरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर में काम करते हैं।
कंपनियों का बयान
जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी इटर्नल लिमिटेड ने इन बदलावों का स्वागत किया है। कंपनी ने कहा कि नए नियम गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करेंगे और लंबे समय में बिजनेस पर कोई नकारात्मक असर नहीं होगा। कंपनी ने यह भी बताया कि वे पहले से ही सामाजिक सुरक्षा योगदानों की तैयारी कर रहे थे।
अमेजन इंडिया ने भी सरकार के कदम का समर्थन किया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता (CoSS) उनकी मौजूदा प्राथमिकताओं के अनुरूप है और कर्मचारियों की सुरक्षा व कल्याण को बढ़ावा देगी।
नए प्रावधान
- एग्रीगेटर कंपनियों को अपने सालाना टर्नओवर का 1-2% (अधिकतम 5% तक) गिग वर्कर्स के कल्याण कोष में देना होगा।
- सभी गिग वर्कर्स को आधार से लिंक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) मिलेगा, जिससे राज्य बदलने पर भी उनका सामाजिक सुरक्षा लाभ जारी रहेगा।
- फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स, राइड-शेयरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे सभी प्लेटफॉर्म वर्कर्स को इसका फायदा मिलेगा।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से एग्रीगेटर कंपनियों की परिचालन लागत जरूर बढ़ेगी, लेकिन असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार कल्याण योजनाओं को कैसे लागू करती है। टर्नओवर की गणना, योगदान की आवृत्ति और लाभ वितरण की प्रक्रिया आने वाले समय में स्पष्ट होगी।
निष्कर्ष
नए लेबर कोड गिग वर्कर्स के लिए एक बड़ी राहत हैं। अब उन्हें सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा, जो पहले केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित था। Zomato और Amazon जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स ने इस कदम का स्वागत किया है, जिससे यह साफ है कि गिग इकॉनॉमी में काम करने वालों का भविष्य पहले से ज्यादा सुरक्षित होगा।

