Online SIR Fraud: OTP और नकली मोबाइल ऐप से यूज़र्स को फंसाने की चाल – टेक डेस्क

बिहार चुनाव के बाद निर्वाचन आयोग मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) करवा रहा है। इस प्रक्रिया के दौरान साइबर ठग सक्रिय हो गए हैं और मतदाताओं को निशाना बनाने लगे हैं। आयोग ने साफ चेतावनी दी है कि SIR फॉर्म भरने के लिए किसी OTP या मोबाइल ऐप की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन स्कैमर्स इस बहाने लोगों को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं।

कैसे काम कर रहा है SIR स्कैम?

साइबर अपराधी खुद को बूथ लेवल अधिकारी (BLO) या निर्वाचन आयोग का कर्मचारी बताकर मतदाताओं को कॉल कर रहे हैं। वे कहते हैं कि आपके मोबाइल नंबर या अन्य जानकारी को अपडेट करने की जरूरत है। इसके बाद वे OTP मांगते हैं और इसी बहाने यूज़र्स को फंसाते हैं।

इसके अलावा, स्कैमर्स WhatsApp या SMS के जरिए फर्जी APK फाइल भेज रहे हैं। इन फाइलों को अक्सर “SIR” या “Voter Helpline” ऐप के नाम से शेयर किया जाता है। जैसे ही कोई यूज़र इस ऐप को इंस्टॉल करता है, फोन का पूरा कंट्रोल स्कैमर्स के हाथ में चला जाता है। वे न सिर्फ फोन का डेटा चुरा सकते हैं बल्कि बैंकिंग जानकारी तक पहुंचकर बैलेंस भी खाली कर सकते हैं।

OTP और फेक APK से सावधान

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR फॉर्म भरने के लिए OTP की जरूरत नहीं होती। अगर कोई आपसे OTP मांग रहा है तो समझ लें कि यह धोखाधड़ी है। इसी तरह किसी भी संदिग्ध APK फाइल या ऐप लिंक को फोन में इंस्टॉल न करें।

खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

  • OTP साझा न करें: अगर कोई कॉल करके SIR प्रक्रिया के नाम पर OTP मांगता है तो तुरंत कॉल काट दें।
  • फर्जी ऐप से बचें: WhatsApp या SMS में मिले किसी भी संदिग्ध APK फाइल को इंस्टॉल न करें।
  • प्राइवेसी का ध्यान रखें: अपने मोबाइल नंबर और व्यक्तिगत जानकारी को अनजान लोगों के साथ साझा न करें।
  • पुलिस को जानकारी दें: अगर आपको बार-बार ऐसे कॉल या मैसेज मिल रहे हैं तो तुरंत पुलिस या साइबर सेल को रिपोर्ट करें।

क्यों है यह खतरा गंभीर?

SIR प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को अपडेट करना है, लेकिन स्कैमर्स इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। OTP और फर्जी ऐप के जरिए वे न सिर्फ व्यक्तिगत जानकारी चुरा सकते हैं बल्कि वित्तीय नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

निष्कर्ष

मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसके बहाने साइबर ठगों की चालें खतरनाक साबित हो सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि यूज़र्स सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल या ऐप पर भरोसा न करें।


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