अगर आपने प्राइवेट सेक्टर में 10 साल तक नौकरी की है और EPFO के सदस्य हैं, तो आप कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत पेंशन के हकदार बन जाते हैं। यह योजना उन कर्मचारियों के लिए है जिनकी सैलरी से हर महीने PF कटता है और जिनका UAN नंबर एक्टिव है।
EPS के तहत पेंशन की गणना एक तय फॉर्मूले से होती है। इसमें आपकी पिछले 60 महीनों की बेसिक सैलरी और डियरनेस अलाउंस (DA) का औसत लिया जाता है, जिसे पेंशनेबल सैलरी कहा जाता है। फिर इसे आपकी नौकरी की अवधि यानी पेंशनेबल सर्विस से गुणा किया जाता है और 70 से भाग दिया जाता है।
EPS पेंशन फॉर्मूला
पेंशन = (पेंशनेबल सैलरी × पेंशनेबल सर्विस) / 70
अगर आपकी पेंशनेबल सैलरी ₹15,000 है और आपने 10 साल नौकरी की है, तो:
पेंशन = (15,000 × 10) / 70 = ₹2,141 प्रति माह
यह राशि सरकारी नौकरी में मिलने वाली पेंशन से कम हो सकती है, क्योंकि सरकारी पेंशन योजनाएं आमतौर पर वेतन के अनुपात में ज्यादा लाभ देती हैं। EPS में अधिकतम सैलरी सीमा ₹15,000 ही मानी जाती है, चाहे आपकी असल सैलरी इससे ज्यादा क्यों न हो।
फैमिली पेंशन का विकल्प
अगर EPS सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को फैमिली पेंशन मिलती है। इसमें पत्नी/पति, बच्चे या नॉमिनी को हर महीने एक तय राशि दी जाती है। इसके लिए फॉर्म 10D या कम्पोजिट क्लेम फॉर्म के जरिए आवेदन करना होता है।
नौकरी बदलने पर क्या करें?
अगर आप नौकरी बदलते हैं, तो EPF फंड निकालने के बजाय उसे नए एम्प्लॉयर के साथ ट्रांसफर करें। इससे आपकी सर्विस अवधि जुड़ती रहती है और पेंशन की गणना में फायदा होता है।

